परीक्षा विभाग

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परीक्षा विभाग और परीक्षाएँ

सितम्बर, १९३८ में समिति ने इन परीक्षाओं के संचालन का काम अपने हाथ में लिया | इस समय तक दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा के अवकाश प्राप्त प्रधान मंत्री श्री पं. हरिहर शर्मा समिति के कार्यो में मदत करने वर्धा आ चुके थे | उन्हें ही परीक्षा – व्यवस्था का काम सौंपा गया | श्री शर्मा जी अनुभवी निष्ठावान कार्यकर्ता थे, उनकी देखरेख में परीक्षाओं की व्यवस्था सुचारू रूप से होने लगी | विभन्न हिंदीतर प्रदेशो में परीक्षा केंद्र खुलने लगे, जहाँ हिन्दी प्रचारक और हिन्दी शिक्षक विद्यार्थियों को हिन्दी परीक्षा में बैठाने के लिए तैयार करते थे | हजारों की संख्या में परीक्षार्थी परीक्षाओं में सम्मिलित होने लगे |

          राष्ट्रभाषा प्रचार समिति द्वारा संचालित प्रवेश, परिचय और कोविद परीक्षाएँ हिंदीतर प्रदेशों में चल तो निकली, परन्तु यह अनुभव किया जाने लगा कि हिन्दीतर प्रदेशों में, एकदम प्रारंभ में ‘प्रवेश’ परीक्षा में बैठना कठिन होता है | इसलिए निश्चय किया गया कि ‘राष्ट्रभाषा प्रवेश परीक्षा’ से पहले एक और सरल परीक्षा चालू की जाए | इस परीक्षा का नाम ‘प्रारम्भिक परिक्षा’ रखा गया |

         समिति की सभी परीक्षाएँ समिति के परीक्षा विभाग के द्वारा संचालित होती हैं | संपूर्ण व्यवस्था का भार परीक्षा मंत्री पर होता है | उसकी सहायता के लिए परीक्षा व्यवस्थापक और अन्य अनेक कार्यकर्ता रहते हैं | श्री. रामेश्वर दयाल दुबे ने परीक्षा मंत्री के रूप में परीक्षा विभाग को एक व्यवस्था दी | समिति का सबसे बड़ा विभाग यही है | वर्ष में दो बार फरवरी / अप्रेल और सितम्बर में परीक्षाएँ होती है | प्रत्येक वर्ष की परीक्षा में लगभग तिन लाख से अधिक परीक्षार्थी सम्मिलित होते है | हजारों की संख्या में समिति के कार्यक्षेत्र में परीक्षा केंद्र है, जहाँ केंद्र – व्यवस्थापकों की देखरेख में परीक्षाओं की समुचित व्यवस्था होती है | संपूर्ण क्षेत्र में हजारों की संख्या में प्रमाणित प्रचारक और हिन्दी शिक्षक है, जो विद्यार्थियों को परीक्षाओं के लिए तैयार करते है |

     परीक्षा विभाग का कार्य अत्यंत व्यापक है, इसलिए उसे विभिन्न अन्य विभागों में बाँटा गया है | मुख्य उपविभाग इस प्रकार है :- परीक्षा केंद्र, प्रमाणित प्रचारक, परीक्षा – शुल्क, प्रश्नपत्र, परीक्षक, आवक, जावक, रिकॉर्ड, स्टाक, आवेदन – पत्र तथा सामान्य विभाग |

   परीक्षा – विभाग के कार्य की व्यापकता का कुछ अन्दाज इस बात से लगाया जा सकता है की प्रति दिन डेढ़ सौ से अधिक पत्र जाते है | मात्र डाक-व्यय मद्दे ही परीक्षा विभाग प्रति वर्ष सात लाख रुपए से अधिक की डाक टिकटें खरीदता है |       

राष्ट्रभाषा परीक्षाएँ 

           हिन्दी के प्रचार-प्रसार के उद्देश से समिति ने आगे चलकर परीक्षाएँ तो अनेक चलाई, किन्तु जो परीक्षाएँ विशेष व्यापक बनी है वे राष्ट्रभाषा प्राथमिक, प्रारम्भिक, प्रवेश, परिचय और राष्ट्रभाषा कोविद है प्रथम तिन परीक्षाएँ अत्यंत सरल है, ताकि हिन्दीतर भाषी उनमें आसानी से बैठ सके | परिचय का मानदंड मैट्रिक परीक्षा के हिन्दी विषय के लगभग है और उसी प्रकार कोविद का मानदंड इंटर या १२ वी की परीक्षा के समकक्ष है| राष्ट्रभाषा कोविद समिति की पहली उपाधि परीक्षा है |

           आगे चलकर दो अन्य उच्चस्तरीय परीक्षाएँ चलाई गईं | ‘राष्ट्रभाषा रत्न’ परीक्षा प्रारम्भ करने के पीछे उद्देश्य यह रहा की योग्य हिन्दी प्रचारक और हिन्दी शिक्षक तैयार हो सके | ‘राष्ट्रभाषा आचार्य’ परीक्षा समिति की सर्वोच्च उपाधि परीक्षा है, जिसके पीछे उद्देश्य यह रहा की ऐसे विद्वान् तैयार हो जो प्रादेशिक भाषा और हिन्दी भाषा के सुन्दर साहित्य को अनुवाद के माद्यम से एक-दुसरे को दे सके और स्वतन्त्र रूप से भी हिन्दी में साहित्य निर्माण कर सके | राष्ट्रभाषा – रत्न तथा राष्ट्रभाषा – आचार्य उच्चस्तरीय परीक्षाओ की उपाधियाँ प्रति वर्ष दीक्षांत समारोह लेकर प्रदान की जाती है |