राष्ट्रभाषा प्रेस

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राष्ट्रभाषा प्रचार समिति एक शैक्षणिक संस्था है ।  प्रारंभ में समिति वर्धा के श्रीकृष्ण प्रेस में अपना काम कराती थी। सन् 1942 के आन्दालेन मे  सरकार ने  श्रीकृष्ण प्रसे पर ताला लगा दिया, तब वधा र्के भास्कर प्रसेसे  काम चलाया गया । आन्दोलन के सिलसिले में 1943 में भास्कर प्रेस के संचालक दोनों जोशी बंधुओं को गिरफ्तार किया गया और उन्हें जेल भेज दिया गया । समिति के सामने एक संकट उपस्थित हो गया । इसको दूर करने के लिए जेल में बैठे जोशी बंधुओं से परामर्श कर भास्कर प्रेस को समिति ने मासिक किराये पर लिया । यह सिलसिला लगभग दा ेवष चर्ला । जोशी बन्धुओं के छूट जाने पर वे स्वयं प्रेस का कार्य देखने लगे।राष्ट्रभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार एवं प्रकाशनों की उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही थी । छपाई की समुचित व्यवस्था की आवश्यकता को देखकर समिति के लिए अत्यन्त आवश्यक हो गया कि उसके पास उसका अपना प्रेस हो । समिति का सारा प्रकाशन परीक्षाओं में लगनेवाली लाखों की संख्या में प्रयुक्त विभिन्न परिपत्रों को बाहर के प्रेसों में छपवाना कठिन हो रहा था । हरएक कार्य पर नियंत्रण रखना उसकी गोपनीयता आदि पर ध्यान देना बड़ा कठिन कार्य था । इन सारी बातों को दृष्टि में रखकर समिति ने दि. 22-5-1946 की बैठक में यह तय किया कि समिति का अपना प्रेस खोला जाए। प्रेस के प्रारंभ में हैंड कम्पोजिंग की व्यवस्था थी, किन्तु बढ़ते हुए काम को देखकर स्वयंचालित मोनो टाइप एवं सुपर कास्टर मशीन खरीदी गई । आज इस प्रेस में स्विफ्ट आफ़सेट मशीन, आटोप्रिण्ट तथा डामिनेण्ट आफ़सेटह्न  तीन आटोमैटिक प्रिण्टिंग मशीनें हैं। सारा कार्य कम्प्यूटर से संचालित होता है। चार रंगों तक की छपाई यहाँ की जाती है। अत्याधुनिक मशीनों के  कारण यह प्रेस विदर्भ के कुछ इने-गिने प्रेसों में गिना जाता है। जैसे-जैसे इस प्रेस की ख्याति बढ़ती गई वैसे-वैसे बाहर से काफी छपाई का काम आने लगा । इसमें महाराष्ट्र राज्य विद्युत महामंडल, महाराष्ट्र राज्य परिवहन, जय महाकाली शिक्षण संस्था, महिला सेवा मण्डल, दूर संचार निगम, वर्धा जिला, मेडिकल कालेज, सेवाग्राम, महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्‍वविद्यालय, वर्धा जैसे शासकीय और अर्धशासकीय प्रतिष्ठान मुख्य हैं ।