राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा : एक विहंगावलोकन

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स्थापना : हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग के नागपुर अधिवेशन में पारित प्रस्ताव के अनुसार महात्मा गांधीजी द्वारा ४ जुलाई, १९३६ को उनके निवास आश्रम सेवाग्राम में राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा की स्थापना की गई |

एक राष्ट्र और एक राष्ट्रभाषा का पवित्र संकल्प लेकर गाँधीजी ने इस समिति की प्राण प्रतिष्‍ठा की और उनकी परिकल्पनाओं को मूर्त रूप देने में डाँ राजेन्द्र प्रसाद, पं. जवाहरलाल नेहरू , नेताजी सुभाषचन्द्र बोस, सरदार वल्‌लभभाई पटेल, जमनालाल बजाज, चक्रवर्ति राजगोपालाचारी, राजर्षि पुरूषोत्तम टंडन, आचार्य काकासाहेब कालेलकर, पं. माखनलाल चतुर्वेदी, आचार्य नरेन्द्र देव आदि महापुरुषों ने जो अथक परिश्रम किया , वह इतिहास के पन्नों पर सुनहरे अक्षरों में लिखा गया है।

उद्देश्य : संपूर्ण भारत में, आवश्यकतानुसार विदेश में राष्ट्रभाषा हिन्दी का प्रचार- प्रसार तथा विकास करना और देशव्यापी व्यवहारों और कार्यो के लिए सुविधा प्रदान करना | राष्ट्रभाषा की परीक्षाओं का संचालन | पाठ्यपुस्तकें आदी का निर्माण व प्रकाशन | भावनात्मक एकता के लिए भाषायी सहयोग द्वारा अनुकूल वातावरण तैयार कर भारतीय भाषाओँ के बिच सामंजस्य स्थापित करना |

कार्यक्षेत्र : 

देश में :  गुजरात, महाराष्ट्र , मुंबई, विदर्भ, मराठवाडा, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, राजस्थान, दिल्ली, असम, अरुणाचल, नागालैंड, मेघालय, मिजोरम, मणिपुर, त्रिपुरा, सिक्किम, बंगाल, ओड़िसा, जम्मू-कश्मीर, अन्दमान-निकोबार, गोवा, बेलगांव, हरियाणा आदि प्रदेश |

विदेश में :  दक्षिण अफ्रीका, पूर्व अफ्रीका, अमेरिका, सूरीनाम, अरब, सूडान, इटली, मॉरिशस, जापान, म्यांमा (बर्मा), नीदरलैंड, फिजी द्वीप, यूनाइटेड किंग्डम, जर्मनी, थाईलैंड, बेहरीन, मस्कत, जावा, श्रीलंका इत्यादि |             

  • परीक्षाएँ :  राष्ट्रभाषा प्राथमिक, प्रारम्भिक, प्रवेश, परिचय | उपाधि परीक्षाएँ – राष्ट्रभाषा कोविद, राष्ट्रभाषा रत्न, राष्ट्रभाषा आचार्य | प्रान्तीय भाषा – प्रारम्भिक, प्रवेश, राष्ट्रभाषा बातचीत परीक्षाएँ | नेहरू-गाँधी, सुलेखन, गाँधी जीवन परिचय परीक्षाएँ |                                                                                                                                                     
  • व्यापक राष्ट्रभाषा प्रचार कार्य : परीक्षा केंद्र -८३८८, परीक्षक -५८२६, प्रमाणित प्रचारक – १८२१२, विद्यालय – ७८०, शिक्षक केंद्र – 987, महाविद्यालय – ६६ |
  • ‘ राष्ट्रभाषा ‘ ( मासिक पत्रिका ) : प्रचार तथा हिन्दी गतिविधियों का सर्वांगपूर्ण  मासिक, मासिक वितरण संख्या -7550                                                                                                                                             एकमुश्त १५०० रु. देकर  आजीवन सदस्य बन सकते है वार्षिक सदस्यता शुल्क १५० |
  • परीक्षार्थी संख्या : अहिन्दी भाषी क्षेत्रों से अब तक समिति परीक्षाओं में १,६६,६७,९६३ परीक्षार्थी सम्मिलित होकर हिन्दी का ज्ञान प्राप्त कर चुके हैं |  
  • विश्व हिन्दी सम्मेलन : ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का साकार स्वरूप विश्व – हिन्दी सम्मेलनों का आयोजन – (प्रथम) नागपुर, (द्वितीय) माँरिशस, (तृतीय) नई दिल्ली, (चतुर्थ) माँरिशस, (पंचम) ट्रिनीडाड, (छठा) लन्दन, (सातवाँ) सूरीनाम, (आठवाँ) न्यूयार्क, (नौवाँ) जोहान्सबर्ग |
  • पुस्तक प्रकाशन : साहित्य- प्रकाशन एवं बिक्री विभाग समिति द्वारा प्रकाशित पुस्तके -२००, प्रकाशित पुस्तको की संख्या -१ करोड़ | जैसे ‘इन्द्र – धनुष में विभिन्न रंग होते हैं, वैसे ही भारत में विभिन्न भाषाएँ हैं, उन्हें सिखिए | समिति के स्वयं शिक्षक प्रकाशन –भारत –भारती माध्यम द्वारा तमिल, तेलगु, मलयालम, कन्नड़, गुजराती, मराठी, असमिया, बंगला, उड़िया, मणिपुरी, पंजाबी, सिन्धी, कश्मीरी | इसके अलावाअतीत के झरोखे से, लोकसेवक श्री. मधुकरराव चौधरी, हिन्दी की प्रचार संस्थाएँ : स्वरूप और इतिहास, राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा का इतिहास तथा गाँधी ग्रंथमाला, टण्डन ग्रंथमाला, विश्व हिन्दी स्मारिका आदि प्रकाशन | विविध भाषओं के साहित्य की माला कविश्री-माला (सभी भारतीय भाषाओँ में मूल एवं देवनागरी तथा हिन्दी अनुवाद के साथ उत्कृष्ट साहित्य की प्रस्तुति | )
  • राष्ट्रभाषा पुस्तकालय – वाचनालय (समिति परिसर में ) : २५,००० से अधिक विविध विषयों की पुस्तके |
  • हिन्दी मंदिर पुस्तकालय (नगर में) : ८,००० से अधिक विविध विषयों की पुस्तके | शहरवासी इससे लाभान्वित होते हैं |
  • विश्व हिन्दी विद्यापीठ : अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक भाषायी समन्वय युक्त विश्व हिन्दी विद्यापीठ की संकल्पना |
  • हिन्दी दिवस : १४ सितम्बर को अखिल भारतीय स्तर पर हिन्दी दिवस के रूप में आयोजित करने की कल्पना समिति ने देश को दी |
  • विश्व हिन्दी दिवस : १९७५ में समिति द्वारा प्रथम विश्व हिन्दी सम्मलेन आयोजित किया गया था | इसी सम्मेलन की स्मृति में भारत सरकार ने १० जनवरी को प्रति वर्ष विश्व हिन्दी दिवस के रूप में मानाने का निर्णय लिया है | विश्व के सभी देशो के भारतीय दुतावासों, सरकारी कार्यालयों में विश्व हिन्दी दिवस मनाया जाता है |
  • स्थापना दिवस  : ४ जुलाई, १९३६ को सेवाग्राम आश्रम स्थित महात्मा गांधीजी के निवास स्थान पर राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा का गठन किया गया था |४ जुलाई का यह दिन समिति के स्थापना दिवस के रूप में प्रति वर्ष मनाया जाता है |
  • राष्ट्रभाषा प्रेस : स्क्रीन तथा ऑफसेट प्रिंटिंग द्वारा कलात्मक छपाईका विशाल केंद्र, टाईप सेटिंग तथा डिज़ाइन्निंग का कार्य |
  • राष्ट्रभाषा महाविद्यालय : असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, मेघालय, त्रिपुरा, सिक्किम के विद्यार्थियों के लिए समुचित अध्ययन एवं छात्रावास की सुविधा | 
  • किशोर भारती हिन्दी प्राथमिक विद्यालय : बालमंदिर एवं प्राथमिक की सातवी कक्षा तक हिन्दी माध्यम से पढाई का प्रबंध |
  • राष्ट्रभाषा माध्यमिक विद्यालय : माध्यमिक शिक्षा का हिन्दी माध्यम से पढाईका प्रबंध जिसे क्रमशः महाविद्यालय तक बढाने का संकल्प |
  • राष्ट्रभाषा टंकलेखन / आशुलिपि प्रशिक्षण केंद्र : राष्ट्रभाषा महाविद्यालय में पढने आनेवाले विद्यार्थी एवं हिन्दिनगर में रहने वाले व्यक्तियों के लिए प्रशिक्षण की सुविधा |
  • कम्प्यूटर प्रशिक्षण केंद्र : उत्तर पूर्वांचल के छात्र तथा इस क्षेत्र में रूचि रखनेवाले विद्यार्थियों के लिए प्रशिक्षण की सुविधा |     

उपलब्धियाँ :

  • राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा गांधीजी के सिद्धांतो के अनुरूप देशभर में फैले हजारो अवैतनिक, सेवाभावी तथा रचनात्मक कार्यों में रूचि रखने वाले प्रचारको के माध्यम से हिन्दी का प्रचार कर रही है | अब तक करीब एक करोड़ साठ लाख हिंदीतर भाषियों को हिन्दी में प्रवीणता दिलाई गई है |
  • राष्ट्रभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार का कम करते हुए समिति ने यह महसूस किया की दुनिया के सबसे बड़े जनतांत्रिक देश की राष्ट्रभाषा और राजभाषा हिन्दी विभिन्न देशों में बोली जा रही है तथा विश्व के करीब १२० विश्वविद्यालयों में उसके अध्ययन – अध्यापन एवं उसमें शोधकार्य की व्यवस्था है तो यह उचित समझा गया की हिन्दी को विश्वभाषा के रूप में विकसित करने की दृष्टी से कदम उठाए जाएँ |

इसी विचार से समिति ने विश्व हिन्दी सम्मेलनों के आयोजन का विचार देश के सामने रखा और सन १९७५ में प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन का आयोजन नागपुर में किया | आज तक ऐसे नौ सम्मेलन आयोजित हो चुके है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी की पहचान स्थापित हुई है |

  • समिति की सतत् माँग और प्रयासों से तथा विश्व हिन्दी सम्मेलनों के मंतव्य  पर आधारित ‘महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविध्यालय’ संसद में प्रस्ताव पारित कर भारत सरकार द्वारा वर्धा में स्थापित किया गया तथा मॉरिशस में ‘विश्व हिन्दी सचिवालय’ की स्थापना की गई | दोनों ही अपने- अपने क्षेत्र में कार्यरत हैं
  • समिति की देश भर के २३ प्रदेशों में २५ से अधिक राज्य इकाइयाँ हैं और भारत के बाहर बीस देशों में उसकी शाखाएँ हैं |