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राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा ( महाराष्ट्र )

महात्मा गाँधी द्वारा स्थापित, अखिल भारतीय संस्था (सन् १८६० के सोसायटीज रजी. एक्ट के अनुसार पंजीकृत ) स्थापना - १९३६

डॉ. राजेंद्र प्रसाद
डॉ. राजेंद्र प्रसाद

राष्ट्रभाषा प्रचार समिति से मेरा परिचय आज का नहीं, बल्कि इसके जन्मकाल से ही रहा है | एस कल में संस्था ने जितनी प्रगति की है उसके लिए सभी कार्यकर्ता बधाई के पात्र है | मैं चाहता हूँ की जिस उत्साह के साथ उन्होंने इस काम को आरंभ किया है उसको दुगुना करके चलाएँ |

मधुकरराव चौधरी
मधुकरराव चौधरी

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की प्रेरणा से स्थापित यह संस्था शुरू से ही राष्ट्रभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार के रचनात्मक कार्य में दत्तचित्त रही है और भारत के सभी हिंदीतर देशवासियों में राष्ट्रभाषा का सन्देश पहुँचाने में सफल हुई है | भारत में भाषायी संघर्ष नहीं, भाषायी सदभाव का जागरण समिति कर रही है |

जवाहरलाल नेहरु
जवाहरलाल नेहरु

राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा ने बहुत अच्छा कम किया है | मैं आशा करता हूँ की उसकी उन्नति होगी और सरल हिन्दी को वह सारे देश में फैलाएगी |

सुभाषचन्द्र बोस
सुभाषचन्द्र बोस

देश के सबसे बड़े भू-भाग में बोली जानेवाली हिन्दी राष्ट्रभाषा की अधिकारिणी है |

जयप्रकाश नारायण
जयप्रकाश नारायण

राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा ने बड़ा ही प्रशंसनीय कार्य किया है | इस कार्य की उत्तरोत्तर उन्नति होती जाए, यही मेरी शुभकामना है |

इंदिरा  गाँधी
इंदिरा गाँधी

राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा ने देश के विभिन्न भागों में रष्ट्रभाषा हिन्दी के प्रचार व प्रसार में जो योगदान दिया है, वह महत्वपूर्ण है | मुझे पूर्ण आशा है की समिति भविष्य में भी इस कार्य के लिए अपना पूरा सहयोग प्रदान करती रहेगी |

मोरारजी देसाई
मोरारजी देसाई

इस समिति की गतिविधियों द्वारा समस्त देश में फैले अनेक लोगों को राष्ट्रभाषा का सच्चे अर्थो में ज्ञान प्राप्त हो रहा है और इस प्रकार के कार्य में राष्ट्रभाषा अपना विशेष स्थान लोगों के ह्रदय में बना लेती है |

आर. वेंकटरामन
आर. वेंकटरामन

मैं राष्ट्रभाषा प्रचार समिती, वर्धा को बधाई देना चाहूँगा जिसने देश में हिन्दी प्रचार-प्रसार के लिए अनुपम कार्य किया है | यह समिति हिन्दी के प्रचार के साथ-साथ राष्ट्रिय भावना जागृत करने में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देती रहेगी, ऐसा मेरा विश्वास है |

पी. वी. नरसिंह राव
पी. वी. नरसिंह राव

राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा ने हिन्दी के प्रयोग को लोकप्रिय बनाने की दिशा में बहुत अच्छा कार्य किया है | मेरी भविष्य के लिए शुभकामनाएँ है |

राजश्री पुरुषोत्तमदास टण्डन
राजश्री पुरुषोत्तमदास टण्डन

इस समिति की निति हिन्दी के स्वरूप के सम्बन्ध में यह हैं की वह प्रांतीयता से ऊपर हो, उसके निर्णय में संस्कृत तथा देश की समस्त प्रादेशिक भाषाओं का साथ हो और वह सच्चे अर्थ में देश की जनता का प्रतिनिधित्व करे |